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Hymn No. 797 | Date: 25-Feb-1999
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प्यार के फूल खिलते हैं कीचड में, डूबके निकलता है सूरज हर दिन ।
प्यार के फूल खिलते हैं कीचड में, डूबके निकलता है सूरज हर दिन ।
तेरे प्रेम में फेल हुये तो क्या, पास होके आयेगे तेरे करीब जरूर ।
राह में रोडे मिलेंगे हजार, कदम तेरी ओर बढ़ते जायेंगे ।
वादियों में छायी होगी तेरी खुशबू, महक बस जायेगी हमारे दिलो में ।
फिकर किस बात की करुँ, जब मन को अहसास हो तेरे साथ होने का ।
गीत गायेंगे हवाओ के संग, कशिश होगी उसमें इतनी तू दूर न जा पायेगा ।
मजबूर हम हैं प्यार में, मजबूर तू भी बन जायेगा ।
तेरा होके रह जाना चाहते है हम, तू भी न रह पायेगा ।
कोई शिकवा न है तुझसे, न देंगे कसमों के वादे ।
हम तो बस तेरा गुणगान गायेंगे, तेरी हर बात पे सर झुकायेगे ।


- डॉ.संतोष सिंह