VIEW HYMN

Hymn No. 798 | Date: 25-Feb-1999
Text Size
ये जुल्फ बरगला रही है हमको हमसे, अब तू बता प्यार क्यों न होगा तुझसे ।
ये जुल्फ बरगला रही है हमको हमसे, अब तू बता प्यार क्यों न होगा तुझसे ।
सनम नजर के सामने हो तस्वीर तेरी, सम्हाले नहीं संभलता दिल मेरा ।
मचलता है न जाने क्या-क्या होता है, हर बात दिल की मन ही मन तुझसे हूँ कहता ।
तेरी आवाज सुनते ही दौडा जाता हूँ हम तो, पलक झपकते तेरे ख्यालों में खो जाते है ।
गुमाँ न करता हूँ जो तेरे साथ होता हूँ, फर्क न कर पाता तुझमें किसी औरों में
प्यार में सब माफ होता है ऐ खुदा, जब तू करीब होता है तो वो पल सबसे हसीन होता है ।
जुदाई में याद आती है तेरी न तेरी खुदाई की, प्यार हम तुझसे हैं करते न तेरे चमत्कारों से ।
कसम प्यार की तुझे प्यार में सराबोर करके छोड़ेगे, दुनिया के हर कोने में गूजेंगी तेरी मेरी प्रेम कहानियाँ ।


- डॉ.संतोष सिंह