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Hymn No. 813 | Date: 03-Mar-1999
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जायेगा कहाँ तू आज बचके, ओ छलिया बिना रंगे न छोडूंगा आज तुझे ।
जायेगा कहाँ तू आज बचके, ओ छलिया बिना रंगे न छोडूंगा आज तुझे ।
प्यारके रंगो की इतनी बौछार करुँगा, तेरी हालत खराब करुँगा ।
गिरफ्त होगी ऐसी छुडे न छुटेगी, भिगो दूंगा तेरे तन-मन को ।
बहुत सुना तेरी आज न सुनूंगा, सर से लेके पैर तक बिना रंगे न छोडूंगा ।
हमारा प्यार होगा इतना तू चाहेगा छिपना, छिप न पायेगा, होली खेलने दौड़ा चला आयेगा ।
रंग में मिलाऊँगा प्यार की बूंद ऐसी, उतारे न उतरेगी कभी तुझपेसे ।
कम न था तू खेल बहुत खेला, आज हम खेलेंगे तुझसे होली ।
हमारी सुध-बुध जाती रही है तो जाने देंगें, तू भी न रहेंगा होश में अपने ।
होली कुछ ऐसी होगी प्यार के रंगो के सिवाय कुछ न होगा चारों और ।
मिला है मौका जो आज, इस पल को खोने न दूंगा ।


- डॉ.संतोष सिंह