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Hymn No. 814 | Date: 03-Mar-1999
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ओ बावरा सइया साँवरा, आया रंग पंचमी का त्योहार आज ।
ओ बावरा सइया साँवरा, आया रंग पंचमी का त्योहार आज ।
रंगुगा जी भरके तुझे, छुडा न पायेगा तू मुझसे बहियाँ आज ।
किया था इंतजार न जाने कितने जन्मो तेरे आने का ।
कृपा किया तूने जो मौंका देके हमको, बनाऊँगा प्यार का गाढा घोल ।
उतारे न उतरेगा प्यार का लाल रंग, कर दूंगा तुझे सराबोरं बाहर-भीतर से ।
खेलूंगा तुझसे खूब, निकल जाये चाहे तन का दम कोई गम नहीं ।
मौका जो मिला अब मानूँगा नहीं, बिन मिलन के तुझे छोडूगा नहीं ।
निकल जाये मेरे मन का हर मैल, खेलूंगा तुझसे जन्मो-जन्म की प्यार भरा होली का खेल ।
रह न गया है मेरे पास, प्यार के सिवाय कोई और रंग, ढल जाऊँगा खुद भी प्यार के रंग में ।
तेरे अंग-अंग में जाऊँगा समाँ, उतारे न उतरूंगा मिल जाऊँगा जो मैं तुझमें इतना ।
- डॉ.संतोष सिंह
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जायेगा कहाँ तू आज बचके, ओ छलिया बिना रंगे न छोडूंगा आज तुझे ।
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नैनों की भाषा है तेरी अबूझ, समझने के चक्कर में बन जाती है पहेली ।
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