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Hymn No. 826 | Date: 08-Mar-1999
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जो कुछ भी मिलता है जीवन में, प्रभु मिले बनके तेरा प्रसाद ।
जो कुछ भी मिलता है जीवन में, प्रभु मिले बनके तेरा प्रसाद ।
तेरे अतिरिक्त कुछ न चाहिये हो जाये चाहे कुछ न क्युँ ।
प्रेम करता हूँ पता नहीं कब से, करुंगा मैं सदा तुझे ।
धारणा बन चुकी है इर्द-गिर्द मेरे तू है, तेरे बिना कुछ नहीं ।
लाख समझा ले तेरे प्रेम के सिवाय कुछ न समझ पाऊंगा ।
जीवन का हर पल तेरा दिया हुआ है, हाथ में कुछ नहीं हमारे ।
जो भी करुँगा तेरी छत्र-छाया में, करवाना है हाथों से तेरे ।
प्यार करता हूँ तुझसे बहुत, प्यार जताना आता नहीं ।
सर्वस्व की बाजी लगा दूंगा, तेरा कहा हुआ करके दिखा दूंगा ।
उबारना होगा तुझे मेरी कमियों से, प्यार की डगर पे चलके दिखला दूंगा ।


- डॉ.संतोष सिंह