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Hymn No. 825 | Date: 07-Mar-1999
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पूजना है अब तुझीको प्यार से अपने ।
पूजना है अब तुझीको प्यार से अपने ।
सपने में होगा तू हमारे अपने प्रिय रुप में ।
सजाऊंगा तुझे अपने हाथों से निहारते हुये ।
नजर न लगे मेरी और किसीकी, माथे पे करुंगा काला टीका ।
दिल में आयेगे जो भाव, वैसे तेरी साँझ बदलता जाऊंगा ।
हाथ न लगाने दूंगा किसीको प्यार तुझे इतना करुँगा ।
दूजा होगा कोई कहाँ से, आयेगा जो भी तेरा स्वरूप बनके ।
फिर मुलाकात का कोई समय न होगा, मैं तो आजीवन होगा ।
मरण पे मेरे उत्सव मनाऊंगा, प्यार के पास जाने का ।
जीवन भर उत्सव मनाऊंगा, प्यार के साथ होने का ।


- डॉ.संतोष सिंह