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Hymn No. 880 | Date: 25-Mar-1999
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मत रुठा कर तू हमसे इतना, आंसू निकल आते है आंखो से ।
मत रुठा कर तू हमसे इतना, आंसू निकल आते है आंखो से ।
दिल सोच में पड़ जाता है, किस बात से मन को तेरे दुःख पहुँचा ।
सह सकता हूँ मैं सब कुछ, तेरा रूठना सह न पाऊँगा ।
तेरे प्यार में खुद को भूला चला हूँ, रूठना तेरा झटका दे जाती है दिल को ।
अहित करना किसी का मेरे वश में नहीं, हम तो गाफिल रहते हैं तेरे प्यार में।
सब कुछ कर सकता हूँ तेरे लिये, दुनिया छोड़ सकता हूँ तेरे लिये ।
आजमा ले डरता न हूँ मैं, बहुत कुछ ऐसा है जो समझ न पाया हूँ अब तक ।
जमाने भर की खुशियाँ लुटा दूं तेरी इक मुस्कान पे ।
कैसे बताऊँ मैं तुझको कितना प्यार करता हूँ, नाही तेरी खुदाई के लिये ।
जी भरके तू मुझे फटकार लेना, पर कभी मुझको अपने आप से दूर न करना ।
- डॉ.संतोष सिंह
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