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Hymn No. 904 | Date: 01-Apr-1999
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कसम से न सोचा था हमने, पहली मुलाकात बदल जायेगी प्यार में ।
कसम से न सोचा था हमने, पहली मुलाकात बदल जायेगी प्यार में ।
नजरों के भीतर जब झाँका था तेरे, अनजाने दिल फिसल गया कदमों में
तेरे ।
जरूरत न थी तेरी मुझे, मैं भी तो कुछ और मांगने आया था तुझसे ।
करीब आते तेरे आलम छाया मदहोशी का कुछ ऐसा, भूल गया अपने होने का।
नजर थी तेरी, निहारना था मेरा, प्यार था तेरा, आनंद में मेरे खडा था ।
व्यतीत हो रहा था सब कुछ दुःख-सुख में, हम तो मस्त थे तेरी मस्ती में ।
अनोखा था वो पल, जब पहली मुलाकात हुयी थी तुझसे ।
बया कर पाना मुश्किल है, ये तो अनुभव की बात है ।
लुटने-लुटाने को कुछ न बचा है, प्यार में तेरे लुटा चुके है हम सब कुछ ।
दम लेने में तकलीफ होती है तन को, दम साधके बम बोल जाने का दिल है करता ।


- डॉ.संतोष सिंह