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Hymn No. 911 | Date: 02-Apr-1999
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सनम माना की जनम दिया है तूने हमे, फिर क्यों तरसाता है इतना ।
सनम माना की जनम दिया है तूने हमे, फिर क्यों तरसाता है इतना ।
रास हमें आता है सब कुछ, जब साथ होता है तेरा ।
लुभाती है तेरी हर अदा दिल को, चाहते है हर पल तुझे साथ अपने ।
तेरा दीदार करते ही, चीत्कार कर उठता है मेरा मन मिलन के वास्ते ।
मजबूर हम है मजबूर तू नहीं । इक करफ तू है इक तरफ तेरी छाया ।
तेरा साया बनके रह जाना चाहता हूँ, मिटना पड़ा तो तैयार हूँ ।
जमीं का वासी हूँ कमी तो स्वाभाविक है, तेरी कृपा से दूर हो जायेगी ।
तुझे देखते ही मचल उठता है दिल, मेरा माफ करना मेरी हरकतों के लिये ।
खाक तो हम पहले से थे, जाना अपने आपको करीब आके तेरे ।
हम भी गवाह हैं तेरे, अस्तित्व हमारा है तुझसे तो तेरा भी है हमसे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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मुझे नहीं जाना उन गलियों में, जहाँ तेरे कदमों की छाप न हो ।
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