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Hymn No. 929 | Date: 06-Apr-1999
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तेरी हर बात सत्य है, हम ही हैं नासमझ ।
तेरी हर बात सत्य है, हम ही हैं नासमझ ।
ज्ञान से तूने समझाया, अपनी अज्ञानता को न छोड़ पाये ।
मैल जो मन में था, उसे तेरे प्यार से न धो पाये ।
धोखा खाया जीवन के हर मोड पे, फिर भी समझ न आया ।
शाश्वत को छोड़, माया को गले लगाया ।
बहुत कुछ किया तूने, पानी फेरा हमने ।
हैरान हुआ होगा तू भी, क्या चाहिये मुझको ।
अदना सा भी साथ तेरा पाके तर गया, क्षुद्र में लाभ न लिया ।
अपनी करनी का सेहरा बांधके पाने तुझे चला ।
रोने से क्या फायदा, जब समय का समय पे उपयोग न किया ।


- डॉ.संतोष सिंह