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Hymn No. 928 | Date: 06-Apr-1999
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तेरा साथ मिलता है, फिर दिल में खालीपन क्यों उभरता है ।
तेरा साथ मिलता है, फिर दिल में खालीपन क्यों उभरता है ।
कहते तुझसे कुछ और है, मन में दूजा भाव फिर क्यों रहता है ।
सँवारा है तूने लाखों को, कब आयेगी बारी इस अभागे की ।
जीवन में तेरे प्रेम की ज्योत कब जलेगी, दिलों में हमारे ।
सहारा है तेरा, क्यों भटक जाते हैं औरो के लिये ।
हम तो है तेरे दास, वास कब तक करेंगा मन में तू हमारे ।
जो कुछ भी पाया तुझसे ही, फिर तेरा साथ क्यों न निभाया।
अपने सवालो का जवाब नहीं चाहता, दूरियाँ मिटा दूँ दिलों की।
मजबूर बन जाना चाहता हूँ प्यार में, तेरा साथ पाने के लिये ।
बिछुड़ना स्वीकार है मुझे सबसे, तुझसे मिलने के वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह