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Hymn No. 931 | Date: 06-Apr-1999
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चूर हो जाना चाहता हूँ, तेरे प्यार के नशे में ।
चूर हो जाना चाहता हूँ, तेरे प्यार के नशे में ।
कोई बात न हो मन में, तेरे प्यार के सिवाय ।
किसी भी पल मुलाकात हो तुझसे, दिल ही दिल में ।
कुछ भी रह न जाये पास मेरे, सौंप दूं खुद को कदमों में तेरे ।
दिल में कोई बात न हो, कह डालूँ निगाहों से तुझसे ।
नींदों में तू आये, आके गीत सुनाके मुझको सुलाये ।
सोचता हूँ कब बात बनेगी मेरी, सारी सीमाओं को तोड़के कब साथ होगा ।
दिलोदिमाग पे हावी होता जा रहा है तू, तेरे सिवाय कुछ न चाहूँ अब ।
कमीं हममें है बहुत, तेरे रहते हावी न होगा कोई ।
जुदाई लिखी है जीवन में तो हँसते हुये करूंगा कबूल मिलन के लिये मौत को लगाऊंगा गले ।


- डॉ.संतोष सिंह