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Hymn No. 941 | Date: 08-Apr-1999
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एक हसीन मुलाकात चाहता हूँ तुझसे, जिसमें कह दूँ दिल की सारी बात ।
एक हसीन मुलाकात चाहता हूँ तुझसे, जिसमें कह दूँ दिल की सारी बात ।
कितनी रातों को आके नींद तूने है चुराया, लुंगा मै इक-इक पल का हिसाब ।
शबाब तेरा बन चुका है पुनम का चाँद, चारों ओर चर्चा चली है जोर शोर से तेरी ।
तरस रहे हैं देखने के लिये तुझे, न जाने कितने जन्मों से हम ।
गँवाया है घडी भर मुलाकात के वास्ते, अपनी जान न जाने कितनी बार ।
अहसास दिलाना चाहता हूँ पास आके तुझे प्यार का अपने ।
निकलता है दम तो निकल जाने दे, मेरे सब्र को न टूटने देना ।
आशीक हूँ मैं बहुत पुराना, आसानी से हार मानुंगा नहीं ।
इस बार ठान के हूँ निकला, मिले बगैर लौटाने वाला हूँ नहीं ।
दिल का वार करेंगे बार-बार, तडप उठेगा तू हमसे मिलन के वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह