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Hymn No. 940 | Date: 08-Apr-1999
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अहसास किसे है किसका, इसका गवाह तो है दिल ।
अहसास किसे है किसका, इसका गवाह तो है दिल ।
मिलना चाहता हूँ तुझसे, आडे आता है मन मेरा ।
साथ निभा नहीं पाता तन मेरा, दिल निकलता है जब तेरी ओर ।
कबूल करता हूँ मैं अपने पापों को, जो दूर रखे हुये है तुझसे ।
रूठना तेरा जायज़ है, हमारी इच्छाओं से भरे मन को देखके ।
शिकार करना चाहता हूँ अपनी कामनाओं का कूर्बान करने के लिये ।
लगता नहीं अब दिल कहीं, ढूंढता है तुझे अपने पास में ।
मदद कर तू हमारी साथ दे दे हमको तलाश करने में तुझको ।
भूला दे हमारे कर्मो को, देखके आधा-अधुरा हमारे सच्चे प्यार को ।
मौका नहीं चाहते, हम तो तेरे साथ रहना है चाहते हैं दास बनके ।


- डॉ.संतोष सिंह