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Hymn No. 939 | Date: 08-Apr-1999
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कैसा है तू माई बाप, रहता है तू साथ हमारे, नजर नहीं आता कभी ।
कैसा है तू माई बाप, रहता है तू साथ हमारे, नजर नहीं आता कभी ।
बडी-बडी बात तू हमको है सुनाता, सच पुछो तो कुछ समझ नहीं आता ।
इच्छाओं को छोडने की बात करता हूँ, पर दिल की बात तू नहीं सुनता ।
कर ले एक बार मुलाकात अपने पुत्र से, नहीं तो कहेंगे लोग हमको अनाथ ।
नहीं चाहता कुछ किसी और से, देता है तू सजा तो कबूल करेंगे हम इसको ।
कहता है तू फंसाता हूँ सबको, सच या झूठ बोलके तुझे न फंसा पाया तो क्या फंसा पाया ।
चिंता मोहे न है मेरी इज्जत की, चिंतित रहा हूँ मै तेरे लिये ।
बहुत पिता देखे तुझसा नहीं, ऐसी कौनसी खता हुयी जो तू सताता है हमको ।
फंसा न तू हमको अपनी बातों में, तुझसे कम में तो हम नहीं मानेगे ।
जाती है तो जान कोई बात नहीं, मुलाकात न कर पाया अपने नाथ से तो कोई मतलब नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह