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Hymn No. 938 | Date: 08-Apr-1999
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बदल दे प्रभु, बदल दे हमारी आदतों को तू बदल दे ।
बदल दे प्रभु, बदल दे हमारी आदतों को तू बदल दे ।
क्या नहीं कर सकता, रचना है संसार को सपनो में अपने ।
नामाकूल की कहाँ कोई औकात, विनंती करता है तुझसे सदा ।
कुछ मांगता नहीं, चाहता हूँ बदलना अपने आपको अनुरूप तेरे ।
हर पल बीते आनंद में, चित्त में न आये कोई दुसरा राम ।
खाबो-खयालों में तू ही, गोता लगाऊं हर पल तेरे नाम में ।
करता रहूँ कोई भी काम, रहे हर पल दिल को तेरा भान ।
सुख-सुविधा की न करता हूँ मांग, मांगते हैं तेरा साथ ।
भेजना अपने लोक में, जहाँ भी कहूँ समझूं तेरा लोक ।
दें देना तू कोई सजा पर वास करना सदा हमारे दिलों में ।


- डॉ.संतोष सिंह