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Hymn No. 948 | Date: 10-Apr-1999
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प्रभु मेरा विश्वास है अधुरा, तो हमारा ना कोई कसूर है कसूर है तेरा ।
प्रभु मेरा विश्वास है अधुरा, तो हमारा ना कोई कसूर है कसूर है तेरा ।
तेरी कल्याणकारी नजरों को मै समझूं अपने दुःखो का कारण तो ये खोट है मेरे मन की ।
छोटा या बडा कोई ना रहा आके पास तेरे, भेद कर गयी मेरी नजर ने तो अधुरा है तेरा ये भक्त ।
दिया है दोनो हाथों से तूने सबको, लेने के लिये हाथ बढाना पड़ता है ग्लानी आ गयी मन में तो फरियाद क्यों करना ।
करीब जो या तेरे हकदार बनाया तूने उसे अपने दिल में तुझे स्थान दे न पाया खामियों का रोना क्यों रोना ।
आजादी दिया तूने सबको, रब नाम का प्रसाद देके, बंधन में बंध गये हम तन-मन के पछताने से क्या फायदा ।
राह देखी किसी और की, आने पे तुझे पहचान न पाया बडी-बडी बातों से मन को क्यों बहलाएँ ।
दहलाया खुदको अपने कर्मो से, चल न सके धर्म पथ पे, फिर तुझसे खोटी आस क्यों करना ।


- डॉ.संतोष सिंह