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Hymn No. 947 | Date: 10-Apr-1999
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बोल बबलुआ बोल, बोल बबलुआ बोल, मिला है मौका दिल का हाल कहना ।
बोल बबलुआ बोल, बोल बबलुआ बोल, मिला है मौका दिल का हाल कहना ।
खोल के रख दे मन की सारी बातें, न जाने कितनी रात गुजरने के बाद आया है उजाला ।
गया हुआ समय फिर न हाथ आता है, चुग गयी चिडीया सारा खेत पछताने से क्या फायदा ।
फायदा यहीं है जीवन का मौके के बाद नहीं आता बोल बबलुआबबलुआ बोल, बोल ....
जितना तड़पा तू उसके लिये, वो भी तडपता था तुझे अपना बनाने के लिय़े ।
तेरा समय कट जाता था नाम लेते हुये उसका, वो तो इतेंजार करे तेरे आने का –
अब न कर देर बोल बबलुआ बोल, बोल ....
जब जागा तू तब ही सबेरा समझ, सुबह का भूला साँझ को लौटे भूला न कहलाये ।
माटी से बना तन है माटी में मिलना तय है, दिल का कहाँ हुआ ही सत्य है बाकी सत्य से परे बोल बबलुआ बोल, बोल ....
रहने न देना कोई राज़ बात, कह देना तू सब कुछ आज, राज़ उससे कोई न छुपा पाया ।
मिलन में बांधा है सूत भर का फर्क, बेडा गर्ग होते देखा है मन के भेद से ।
बोल बबलुआ बोल, बोल बबलुआ बोल, खोल दे अपने मन के द्वार को बोल बबलुआ बोल ।


- डॉ.संतोष सिंह