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Hymn No. 96 | Date: 01-Apr-1997
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तेरे आगोश में हर बार लेता हूँ पनाह
तेरे आगोश में हर बार लेता हूँ पनाह
जब दिल टूट जाता है दुनिया की बेवफाई से ।
मेरी जंग किसी गैर से ना है,
खुद से ही लडता हूँ मैं तुझे पाने के लिये ।
जब आती है याद मुझे तेरी हर वक्त ;
मुझे ये नहीं पता तुझे पाने के लिये क्या करना है मुझे ।
तेरा दामन थामने के लिये मेरा हाथ उठे बार – बार,
अनहोनी के डर से रूक जाते है हर बार ।
क्या कसर बाकी है मेरे प्यार में ;
भीड़ में भी तनहाँ रहता हूँ मै तेरे लिये ।
तेरे मेरे बीच में है क्यों ये दूरी ;
अब तो मेरे मन का हो गया है तू एक अंग ।
चाहे दर्द देना है जितना दे दे मुझे ;
पर रहना होगा तुझे मेरे संग हर पल ।


- डॉ.संतोष सिंह