VIEW HYMN

Hymn No. 97 | Date: 26-Apr-1997
Text Size
मिट जाने दे खुद को, गम ना कर मिटने का,
मिट जाने दे खुद को, गम ना कर मिटने का,
शायद उससे जुडने की शुरूआत हो यें।
दुनिया की नजरों में चाहे हो ये खोना,
पा लेगा तू उसको जिसके बाद कुछ नहीं रह जाता पाना,
पाने न पाने, को फिक्र तू छोड दें
तुझको तो है उससे जुड जान ।
बांध ले तू उसको प्रीत की ड़ोर से
बंधन है ये पुराना किसीके बस में ना है उसको तोड़ पाना ।
उससे छूट जाने पे मिट जान है सारा भेद
दुश्मन भी दोस्त नजर आयेंगे ।
शेष से आये थे शेष में हम सबको मिल जाना है।


- डॉ.संतोष सिंह