VIEW HYMN

Hymn No. 966 | Date: 14-Apr-1999
Text Size
सच पूछो तो दिल से कहता हूँ, अपना हाल तुझसे ।
सच पूछो तो दिल से कहता हूँ, अपना हाल तुझसे ।
चालाकी करता हूँ पर छुपाता नहीं, कुछ भी तुझसे ।
खुदा तेरी रहमत चाहता हूँ, पर वैसा काम नहीं करता ।
पूजा तो बहुत करता हूँ, पर ध्यान भटक है जाता ।
प्यार की तरंगो में झूमते हुये, खुद को बिसार देना चाहता हूँ ।
उन्माद ऐसे छाये तेरे प्यार का, जीते जी मिसाल बन जाऊं ।
किसी की नजरों पे न है चढना, तेरे कदमो में है रहना ।
अलग बहुत रह लिया, अब तेरा साथ चाहता हूँ ।
जो मन मानता न था, वो भी अब तुझे है मानता ।
जो ढूँढता था यहाँ-वहाँ, वो सब कुछ पा गया तुझमें ।


- डॉ.संतोष सिंह