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Hymn No. 978 | Date: 16-Apr-1999
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न पाने की है तमन्ना, न खाने का डर ।
न पाने की है तमन्ना, न खाने का डर ।
हर हाल में खुश है, जो प्यार तुझसे हो गया ।
सर झुका के क्या फायदा, दिल को दीदार जब न हुआ यार का ।
पुजा कर करके क्या फायदा, जब प्यार तुझसे न हुआ ।
रब को ढूंढने चला इस संसार में ।
होश में जब आया, तब सबसे करीब उसको पाया ।
लोगो की क्या बात करना, साया को भी साथ छोड़ते देखा ।
ऐ प्रभु जो साथ पकडा तेरा, जुदा होता रहा तन पर तेरा हाथ न छूटा ।
लुटा न पाया अपने आपको प्यार में तेरे ।
तो कैसे छायेगा तेरे प्यार का सरूर हम पे ।


- डॉ.संतोष सिंह