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Hymn No. 979 | Date: 16-Apr-1999
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ऐतबार है मुझको तुझपे, इस जहाँ में तेरे सिवाय कोई न है मेरा ।
ऐतबार है मुझको तुझपे, इस जहाँ में तेरे सिवाय कोई न है मेरा ।
हर रिश्ते को बदलते देखा, समय के संग-संग पुराने को नये की जगह लेते देखा
छाया को साथ छोड़ते देखा, राह में नये-नये हमराही मिलते रहे ।
सिलसिला न ये बदला कभी, हर जन्म में यही कहानी को दोहराते देखा ।
सदगुरु जब से तेरे पास आया, बीतना बिताना भूलाके खुद को वर्तमान में पाया।
गम और खुशी के दौर आते रहे, तेरा हाथ हाथों में लिये हम आनंद में रहे ।
बात होती न है अब कुछ मन में, सारे सवालों का जवाब जब मिलता है दिल में ।
हर आदत अब बदलती जा रही है, जब से तूने हमको अपने पास बुलाया ।
मजबूर और गुरुर का है साथ छूटा, दिवाना मस्त हुआ तेरे प्यार की मस्ती में ।
जीते हुये भी भूला सब कुछ तेरे ख्यालों में खोये हुये जानते हैं इसमें भी है तेरा हाथ ।
- डॉ.संतोष सिंह
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न पाने की है तमन्ना, न खाने का डर ।
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