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Hymn No. 98 | Date: 10-May-1997
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हो गयी है यारो मेरी तुझसे, इस रिश्ते की है कसम तुझको ।
हो गयी है यारो मेरी तुझसे, इस रिश्ते की है कसम तुझको ।
मेरी बेवफाई को रूसवाई समझना, दुःख हो या सुख, छोडना ना मेरा संग ।
यार की यारी के आगे हर रिश्ते – नाते को फीका पाया ।
मेरी आँखों पे तूने बाँध रखी है माया की पट्टी ।
लडखड़ाऊँ या गिर पडूँ तो है संभालना तुझको ऐ मेरे प्यार ।
नजरों के रहते हो गया हूँ मैं अंधा तेरी नजरों से जग देखना चाहूँ ।
माना मैं तेरे आगे कुछ भी नहीं, तेरा साथ पाके मैं कुछ तो सही।
कितना भी हो बेमेल तेरा मेरा संग, पर होना है मेल तेरे ही संग ।


- डॉ.संतोष सिंह