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My Divine Blessing
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Hymn No. 99 | Date: 27-May-1997
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हें परम प्रभु करते है तूझे प्रणाम बार – बार
हें परम प्रभु करते है तूझे प्रणाम बार – बार
गुनगुनाते है तेरा नाम असंख्य कोटि – कोटि ।
अगर तू सुर्य है तो तेरी किरणे है हम ;
तेरे महान ब्रह्माण्ड के एक क्षुद्र कण है हम ।
तू व्याप्त है सर्वत्र तो व्याप्त हम में भी है
हम अंजान हो तुझसे, पर तू तो जानता है सब कुछ ।
ज्ञानवान हो के भी तू कहलाता है निर्गुण ;
मिथ्या जगत में प्रवेश करके बन जाते है हम अज्ञानी ।
प्रीत की ठोर से बांध रखा है मैंने तुझको
इस अँधेरे मन में ज्ञान की ज्योत जलानी है तुझको ।
- डॉ.संतोष सिंह
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