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Hymn No. 1004 | Date: 23-Apr-1999
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हाथ है जिसके सर पे तेरा, बाल बाँका कोई क्या करेगा ।
हाथ है जिसके सर पे तेरा, बाल बाँका कोई क्या करेगा ।
हाथों में हाथ हो जो तेरा, इस जग में फिर किससे है डरना ।
कदमों में जो बैठे हो तेरे, दिल को फिर दुनिया की कोई न खबर ।
प्यार जो हुआ तुझसे एक बार, गम और खुशी धुँआ बनके उड़ गये ।
निगाह मिलते ही न जाने क्या पाते हैं, सचमुच ये सुख कहीं और मिलता नहीं
बोल गूंजे जब तेरा दिल में, रहते है जहां में पहूँच जाते है कहीं और ।
मुस्कान है तेरी ऐसी, हर लेती है चित्त की सारी कटुता ।
जो तेरे करीब एक बार आ गया, जनम-जनम की साध हो जाती है पूरी ।
शाश्वत सर्वत्र है तू, तेरी मैं एक छाया, तेरी कृपा से तुझको है पाया ।
दे या न दे तू कुछ मुझे, रख ले बस साथ तेरे सदा के लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह