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Hymn No. 1003 | Date: 23-Apr-1999
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नजर लड़ी है जबसे, लगता नहीं मन मेरा तेरे बिना ।
नजर लड़ी है जबसे, लगता नहीं मन मेरा तेरे बिना ।
एक ही खयाल है रहता, मुलाकात हो जाये पल भरके वास्ते ।
हाल हो गया है बहुत बुरा, होश होके होश में न रहता हूँ ।
कुछ सूझ नहीं रहा मन को, तेरे बिना कहीं और मन लगता नहीं ।
अनाड़ी हूँ कुछ जानता नहीं, प्यार को जाना तेरे पास आके ही ।
जैसे-जैसे करीब होता हूँ तेरे, न जाने कब पड़ जाते हैं कदम गलत मेरे ।
जो सोचा न था वो हो जाता है, जहाँ से चले थे वहीं पहूँच जाते हैं ।
अब तक डरता था गिरने से, तेरा प्यार जो पाया हर डर निकल गया ।
बढ़ना मेरा काम है हर पल तेरी ओर, जो भी होगा हाल मजा आयेगा ।
जात है मेरी बड़ी खराब, बिना गिरे अब तक सीखा न हूँ कुछ ।


- डॉ.संतोष सिंह