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My Divine Blessing
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Hymn No. 1002 | Date: 22-Apr-1999
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अर्ज करता हूँ मैं तुझसे, कुछ कहने के वास्ते ।
अर्ज करता हूँ मैं तुझसे, कुछ कहने के वास्ते ।
लायक तो नहीं मैं तेरे सामने मुंह खोलने को ।
ऐतबार कर ले तू इस बार, मौका दे दे एक और बार ।
कोई ऐसै कर्म तो नहीं, जो रखनी पड़े तुझे बात मेरी ।
चाहे जो दे देना सजा, दूर न करना मुझे तेरे पास से ।
है तेरा हृदय बहुत विशाल, बदल जाऊंगा तेरे साथ रहके ।
ऐ दयानिधान तेरा कुछ न जायेगा, मैं धन्य-धन्य हो जाऊंगा ।
गलती करते हैं कई-कई बार, सीख लेते नहीं एक बार ।
तू चाहेगा तो सँवर जाऊंगा, कीचड़ में रहके तेरा गुन गाऊंगा ।
मालिक मुरझाने न देना, हमको तेरे प्यार से सींचते रहना ।
- डॉ.संतोष सिंह
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