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Hymn No. 1007 | Date: 23-Apr-1999
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डुबा दे तू मुझे तेरे प्यार में इतना, मेरा मैं मुर्दा बन जाये ।
डुबा दे तू मुझे तेरे प्यार में इतना, मेरा मैं मुर्दा बन जाये ।
हरा सकता नहीं कोई मुझे, हार जाता हूँ प्रभु अपने मन से ।
बना दे मेरे दिल को तू विशाल इतना, आहत न कर पाये कोई भाव ।
हिचकोले खाता रहूँ हर पल, सुख-दुःख की आधियों में बेपरवाह होके ।
मुक्त कर दे तू मुझे, तेरे निर्मल प्यार में बह जाऊं अनंत में ।
इच्छाओं के जब-जब आये हैं तूफाँ, डूबा है उसमें तन-मन मेरा ।
तेरे प्यार का दीप जलता रहे दिलों में, डूबा रहे उसमें तन-मन मेरा ।
मजबूर कर देती है भटकने को मन की तम से भरी अंधेरी गलियाँ ।
सजा जो भी देना स्वीकार है मुझे, पर तेरा सानिध्य मिले सदा ।
कमियाँ तो है जन्म से जुडी, रह-रहके जोर मारती हैं अलग-अलग हो जाने
को ।


- डॉ.संतोष सिंह