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Hymn No. 1011 | Date: 25-Apr-1999
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मोह ले तू चित्त को हमारे, अपने मोहक अंदाज से ।
मोह ले तू चित्त को हमारे, अपने मोहक अंदाज से ।
मुस्कान है कातिल तेरी, जो घायल करती है दिल को ।
नजरों से बाण चलाना कोई तुझसे सीखे, बिना शोर के चोट करे ।
जब गूंजे तेरी आवाज फिजा में, घायल मन सुध-बुध खो देता तुझमें ।
कभी-कभार जब सामने होता हूँ तेरे, देखते सुनते लोप हो जाता है प्राणों का ।
तेरे साथ रहना कुछ अजीब सा लगता है। कुछ कह पाना है मुश्किल ।
इतना जरूर है उमंगो से भर जाता हूँ, जब तेरे पास आता हूँ ।
दिल गवाह है जब-जब आया हूँ करीब तेरे, आनंद का ज्वार उमडा है भीतरसे।
गजब की है तेरी अदा, न जाने कब हो गये हम फिदा ।
तेरी यादो का क्या कहना, पर तेरा साथ होना है लाजवाब ।


- डॉ.संतोष सिंह