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Hymn No. 1012 | Date: 25-Apr-1999
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आज नहीं तो कल मंजिल को पायेंगे जरूर, कांटो पे चलना पडा तो चलके जायेंगे जरूर ।
आज नहीं तो कल मंजिल को पायेंगे जरूर, कांटो पे चलना पडा तो चलके जायेंगे जरूर ।
उठे हुये कदमों को रोक न सकता कोई, आंधी आये या तुफाँ चल पड़े तो चलते जायेंगे जरूर ।
राह में मिलेगे खजाने अनेक प्रकार के, दिल में होगा कुछ भी मंजूर नहीं बढ़ते जायेंगे जरूर ।
हौसला अफजाई से ज्यादा, पस्त करने वाली बातें होंगी अनेक- हम जैसे सिरफिरे होते है लाखों में एक बढ़ते जायेंगे जरूर ।
रोकने के लिये हजारों साथी मिलेंगे, जो ठाना है तो तोड़ना होगा सब कसमों-वादों को चल पडे है तो चलते जायेगे जरूर ।
मंजिल को पाना सबसे बड़ी खुशी है बाकी तो छलाव मात्र है, डिगा नहीं सकता
कोई अब मुझे चल पडे तो चलते जायेंगे जरूर ।
अपने गुरूर की बात न हूँ करता, आशिर्वाद जो होगा सदा साथ उसका कदम
अपने आप उठते जायेंगे जरूर ।
एक-एक करके टूटता रहेगा तन-मन परवाह नहीं, दिल में होगा जो प्यार रुक
पायेंगे नहीं हम बढ़ते जायेंगे जरूर ।
न किसी की अब है सुनना अपने रौ में बढ़ते जाना, परम विश्वास के संग
हम चलके जायेंगे जरूर ।
ओर-छोर का न हो पता तो क्यों घबराना जब कहाँ है उसने तो कुछ न
सोंचना बढ़ते जायेगे जरूर ।


- डॉ.संतोष सिंह