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Hymn No. 1014 | Date: 26-Apr-1999
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तेरे नाम की कलम पकड़ी जो हाथों में, भरी स्याही उसमें तूने प्यार की ।
तेरे नाम की कलम पकड़ी जो हाथों में, भरी स्याही उसमें तूने प्यार की ।
बोल फूटे तेरे दिल में, तराने बनके उभरे मेरे द्वारा ।
कहीं न आने दिया खुद को, करता रहा तू सब कुछ ।
नाम-सम्मान हमें दिलाया, खुद रहा तू ओट में ।
बिखरे हुये थे सहेजा तूने हमें, खड़ा होने लायक बनाया ।
जो सोचा न था कभी, वो तेरे प्यार ने कर दिखाया ।
जन्म पे जन्म लेते हैं लोग जिसके वास्ते, वो भी पाया पास आके तेरे ।
सहज विश्वास करना है मुश्किल, इतनी सरलता से तू है बीच हमारे ।
तेरे बारे में ख्वाब तक न देखा था, पास पाके हम पहचान गये ।
कोई माने या न माने, हम तो कहेगे प्रभु हमारे साथ जीते थे ।


- डॉ.संतोष सिंह