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Hymn No. 1015 | Date: 26-Apr-1999
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कह लेने दे आज मुझे मेरे दिल की, सुनना पड़ेगा तुझे सब कुछ ।
कह लेने दे आज मुझे मेरे दिल की, सुनना पड़ेगा तुझे सब कुछ ।
भौंरा बनना चाहता हूँ, जो तेरे पहलू में सिमट के दम तोड़ सकूँ अपना ।
ढलना चाहता हूँ, जो तेरे पहलू में सिमट के दम तोड़ सकूँ अपना ।
ढलना चाहता हूँ तो ढाल दे मुझे, तेरे गीतों में, गूंजे अनंत दिशाओं में ।
ये रास न आये तो तू बन जाने दे तेरे दर की चौखट, जो तेरे और तेरे प्रेमियों के कदमो को चूमता रहूँ ।
बढ़ती जाये मेरे दिल में तेरे प्रति प्यार इतना, बन जाऊं तेरी आँखों का तारा ।
ज्यादा कुछ कह गया तो बना ले तेरे दर का श्वान, रहूँ वफादार सदा तेरे प्रति।
कोई ऐरा गैरा नहीं प्रेमी मैं तेरा, तेरे मन माफिक तरंगो के अनुरूप रूप धरूँ मैं
ये सब न चाहे तू तो बना दे मुझे बावरा, जो सलाम करते चले तुझे हर इक में देखके।
मुझे न चाहिये स्वाभिमान या कोई और भाव, जो प्रत्येक करता हो मुझसे
कुछ कर ऐसा बना दे मुझे तेरा प्रबल विरोधी, जो हर पल मारा जाये हाथों तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह