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Hymn No. 1034 | Date: 04-May-1999
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प्रभु ने क्या न दे दिया, चुटकी में सारा ब्रह्मांड सौंप दिया ।
प्रभु ने क्या न दे दिया, चुटकी में सारा ब्रह्मांड सौंप दिया ।
देखके प्यार उसका शरमा जाता हूँ अपने आप पे ।
राह के पत्थर को हाथों-हाथ लेके अपना बना लिया ।
खाते थे ठोकरें दुनिया की, पा गये जगह दिल में उसके ।
हाथ जोड़के करता हूँ निवेदन, मत कर कृपा हमपे इतनी ।
सम्भाल न पाऊंगा देखके इतनी खुशियाँ बौराया मन मेरा ।
हम तो ठोकर खाने के लिये बने हैं, खुश होने लगे चरण पड़ते ही तेरे ।
छाप पड़ चुकी है तेरी, खुशियाँ मनायेगे रो-रोके कदमो में तेरे ।
सारे सपने सच हो गये तो कैसे पडेंगे इस अभागे पे चरण तेरे ।
रहबर मेरा न चाहिये कुछ मुझे, कृपा कर इतनी जहाँ पड़े कदम तेरे धूल बनूँ वहाँकी ।
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मंद-मंद मुस्कराता चेहरा लेके करने ।
नमन पहुँचा संतोष प्रभु के पास ।
प्रभु ने पूँछा है क्या खास बात ।
आप प्रभु होते हुये न जान पाये ।
आज है मेरी सालगिरह ।
चमकता है तू इसलिये खास,
प्रभु आप भी मेरा नाम न जानते ।
आप चलायेंगे कैसे विश्व का भार ।
बता दो प्रभु कहाँ है मेरा स्थान ।
मै भी चमक रहा हूँ तू पूछता क्यों ।
चमक रहे आज आप ऐसे ।
संतोष की आज मनायेंगे हम सालगिराह ।


- डॉ.संतोष सिंह