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Hymn No. 1038 | Date: 05-May-1999
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काका नाम है तेरा, क्या नहीं समाया है तुझमें ।
काका नाम है तेरा, क्या नहीं समाया है तुझमें ।
ब्रह्मा, विष्णु, हो या महेश, लगता है तू सबका काका ।
माँ भी न रह पाये अपने प्यारे काका के बिना ।
किस्मत की लकीर को मिटाके लिखनेवाला काका ।
अपने प्यार भरे गीतों से भक्तों के प्राण हरने वाला ।
चलती नहीं तेरे सामने किसीकी, प्यार से नमन जिसने किया ।
स्वीकार किया उसे चरणों में अपने, तेरा प्यार देखके शरमाया वो ।
परमपिता तो स्वयं से लड़ता है हम क्षुद्रों के वास्ते ।
क्या नहीं करता तू हमारी क्षुद्रता मिटाने के लिये ।
करोड़ो है तुझे प्यार करने वाले, फिर भी स्वीकारे हमे दरबार में अपने ।
कोटिकोटि नमन करके, चीर के चढाऊं दल कमल को तेरे चरणो में ।
तेरे दीदार का हकदार बन नहीं पाऊंगा, होगी कृपा तभी मिलेगी ।


- डॉ.संतोष सिंह