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Hymn No. 1041 | Date: 06-May-1999
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करने करवाने वाला तू है, माने या न माने ।
करने करवाने वाला तू है, माने या न माने ।
फिकर किस बात की करें, जाने या अनजाने ।
छिपा न है तुझसे कुछ, कर्ता भोक्ता एक तू ।
दुःख किस बात का करुँ, अज्ञान का या ज्ञान का ।
रोना क्यों रोये जब आये धरा पे तेरा बनके ।
बेखुदी में जीना चाहते है, दे दे तू सामर्थ्य इतनी ।
किंचित मात्र विचलित या विक्षेप न आये चित्त में हमारे ।
जो होता रहे होने दे, जीवन की लड़ियों में, तेरे गीतो को पिरोने दे ।
प्यार आज किया है तुझसे, कल भी करेंगे करते रहेंगे ।
कमजोर हूँ कितना भी दमदार बना देगा प्यार तेरा हमको ।


- डॉ.संतोष सिंह