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Hymn No. 1042 | Date: 06-May-1999
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रोक सकता नहीं कोई मुझे, तेरी नजरों का पैमाना पीने से ।
रोक सकता नहीं कोई मुझे, तेरी नजरों का पैमाना पीने से ।
जीवन की अनजान गलियों में, तेरे गीतो को गाने से ।
बेखौफ हो चुका हूँ जब से, हुआ हमको प्यार तुझसे ।
कोई क्या कर लेगा जब तक सहमति न होगी तेरी ।
करने का मुझे न है कोई रोना, साथ जो तेरा है बेधडक बढते जाना ।
अबूझ है कई कर्म ऐसे, ऐ..आश्रयदाता जो तू न चाहे वो हम कर नहीं सकते ।
दुःखो का रोना रोने हमे आता नहीं, मदद मांगेगे तुझसे एक बार नहीं हजारों बार ।
सिलसिला चला है चलता रहेगा, जब तक चाहेगा तू ।
इक झटके में खत्म हो सकता है, तेरी मर्जी के अनुरूप ।
झूठा पड़ता हूँ मैं तो पडने देना, झूठा पड़ता नहीं तू कभी ।


- डॉ.संतोष सिंह