My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 1044 | Date: 07-May-1999
Text Size
मार दे आज तू मुझे मार दे पूर्णतः छिन्न-भिन्न हो जाये मेरा मैं ।
मार दे आज तू मुझे मार दे पूर्णतः छिन्न-भिन्न हो जाये मेरा मैं ।
बनना नहीं मुझे किसी का पुत्र-पिता, न कहलाये कोई भी मेरी माता ।
बंधु-सखा और सगे सबंधी सब कुछ है, तन-मन का बंधन, मार दे तू आज मुझे
नहीं चाहिये हर जन्म में अलग-अलग रिश्ते नाते, शुरु से आज तक तू है मेरा ।
ऐ.. शाश्वत पिता तू चाहे सुख में रख या दुख में, इन सबसे परिवर्तन न आये हमारे मन में ।
तेरे हाथों की है कठपुतली, जैसा तू नाच नयाचे वैसे नाचते जायें, तेरे आनंद में बहते हुये ।
लाभ-हानि से मुक्त हो तेरा संग, किंचित रंज न हो दिल में किसी बात के बनने और बिगड़ने का ।
मैं किसी से न लड़ने आया हूँ, न ही किसी के प्यार पे है अधिकार, मैं तो आया हूँ मरने तुझपे ।
संसार में भोग रहे हैं लोग एक दूजे को, मेरे नजरों में भोग-भोगता बस तू है।
देदे दिल को इतनी मजबूती, फरियाद न करुँ किसी बात की, हो जाये तन-मन को कुछ भी ।
छाया को कोई अधिकार न है, न उसमें प्रेम और ज्ञान की पहचान, वो तो तेरी माया का एक है पहलू ।
जीने और मरने में भेद न रहे, मेरा कहाँ हुआ अधूरा है, तेरा जाना हुआ है पूरा ।
मार दे तू आज मुझे मार दे पूर्णतः ........
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
दाग थे हमारे जीवन पे कई, बेदाग बन चुका हूँ साथ मिलते तेरा ।
Next
छुप नहीं सकता तू हमारी नजरों से, दिल ढूंढ लेगा तुझे हर कहीं ।
*
*