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Hymn No. 1046 | Date: 07-May-1999
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कोई वादा न करुँगा तुझसे, वादे को निभाना हमें आता नहीं ।
कोई वादा न करुँगा तुझसे, वादे को निभाना हमें आता नहीं ।

फितरत हमारी तू है पहचानता, अपने पास बुलाया समझ में आया नहीं ।

तेरे भक्तों का हूँ दास मैं, आधा कच्चा-आधा पक्का ।

तेरी बतायी हुयी हर बात को समझू मैं आधा गलत, आधी सही ।

मुझे सिखाने का कोई लाभ है या नहीं, ये भी जान नहीं पाया ।

हाँ इतना दिल को रहता है अहसास, हर पल बरसाता है प्यार तेरा ।

कुछ भी अर्पित न किया तुझे, फिर भी दिया तूने सब कुछ मुझे ।

तू है सर्वोत्तम, तो हममे कही उत्तमता का कोई चिन्ह नहीं ।

तूने बदला है बहुत कुछ हममें, हम ही जाने-अनजाने रहे उससे ।

मांगा न कभी कुँछ, फिर भी जो तू चाहे ले सकता है बिन बताये ।


- डॉ.संतोष सिंह