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Hymn No. 1048 | Date: 08-May-1999
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मन का हर डर निकलता जा रहा है, जैसे-जैसे प्यार का घूंट भरता जा रहा हूँ।
मन का हर डर निकलता जा रहा है, जैसे-जैसे प्यार का घूंट भरता जा रहा हूँ।
बैचेनी हवा हो गयी है मेरी, मुलाकात होते ही तुझसे निश्चित हो चुका हूँ ।
अंदाज न था हमको इतना तेरा, तुझे पाते मेरे सारे ख्वाब बदल गये ।
किताबो में पढ़ा था होते है खुदा धरा पे, मिलते ही दिल पहचान गया तुझको ।
सुन-सुनके डरा करता था, तेरा साथ मिलते ही निःशंक हो गया मेरा मन ।
परवाह न रही अब किसी बात की, आंख मिलते ही विश्वास, लबालब भर गया।
समझदार बनते फिरते थे पहले, दिल करता है पागल हो जाने का तेरे प्यार में।
असर किसीकी न पडती थी, सरदार जो तू मिला बदल गया जीवन मेरा ।
खामखाह होते थे परेशान, हमारा हर काम आसान हो गया नाम लेते तेरा ।
कोई क्या दे देगा मुझे, जो तुझसे न मिला वो कहीं और से कहाँ मिलेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह