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Hymn No. 1051 | Date: 09-May-1999
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छायी हमपे तेरे प्यार की मस्ती ऐसी, उतर गया मेरा सारा खुमार ।
छायी हमपे तेरे प्यार की मस्ती ऐसी, उतर गया मेरा सारा खुमार ।
चढी उसके बाद तेरे प्यार की खुमारी ऐसी, होश न रहा हमे किसीका ।
दिन-प्रतिदिन बढती जा रही है, खोते जा रहे है हम खुदको तुझमें ।
ऐसा कैसे हो गया, न जाने कब तेरे प्यार के जादू का शिकार हो गये ।
मिट्टी में से आकार दिया तूने, रूप रंग ही नहीं बुद्धि दिया स्वः के जैसे ।
कृपा कितनी बरसायी, कीचड़ में कमल की भांती खिलना सिखाया तूने ।
क्या नहीं किया हमारे वास्ते, झेला ऊपर दुखो को जो थे हमारे ।
शाश्वत आनंद का रसपान कराया, हमारे थोडे से प्यार के वास्ते ।
तोड़ दूंगा सारी जंजीरे काल्पनिकता की, प्यार के वास्ते प्यार लेके आयेगे ।
मिटते रहेगे हर पल, पर तुझे प्यार करते रहेगे चाहे जो कुछ भी हो ।


- डॉ.संतोष सिंह