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Hymn No. 1052 | Date: 09-May-1999
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नजरों से नजर मिलते ही डूबने-उतरने लगते है खयालो में तेरे ।
नजरों से नजर मिलते ही डूबने-उतरने लगते है खयालो में तेरे ।
एक बार मन को जो याद आ गयी तेरी, भुलाये न भूलता फिर तुझे ।
मुलाकात तुझसे जो हुयी, धीरे-धीरे बदल गया प्यार में तेरे ।
नाकाबिल बनता जारहा हूँ ज्यों-ज्यों डूबता जा रहा हूँ प्यार में तेरे ।
यार मैं तो हो चला कूर्बान, जब से बन गया है तू मेरी जान ।
रह न गयी जरूरत पहचान की, तेरी पहचान जो बन गयी पहचान मेरी ।
अच्छे-बुरे से कहीं दूर बन जाने दे मुझको तेरा ।
बहुत हो गया खेल माया का अब न डाल कोई और जेल में ।
घायल हुआ हूँ बार-बार अब तो कर ले दिल से मुलाकात तू ।
मत देख मेरी औकात, दे-दे सौगात मुझको अपने प्यार की ।


- डॉ.संतोष सिंह