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Hymn No. 1054 | Date: 10-May-1999
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खनकने लग जाता है मेरा दिल, सुनते ही तेरे गीतो को ।
खनकने लग जाता है मेरा दिल, सुनते ही तेरे गीतो को ।
झलकने लगती हैं छिपे हुई उमंग हमारी, ज्यों आते है करीब तेरे ।
ये गरीब दुनिया की सबसे बड़ी दौलत पा जाता है, तेरी महफिल में शरीक होके।
सुरूर ऐसा चढ़ता है तेरी मुहोब्बत का, घंटे-पलों में है बदल जाता ।
बिखरा हुआ मन भी जुड जाता है तुझसे, मुलाकात होते ही ।
बदहाली का हर ख्याल निकल जाता है, जब मेरे सामने तू ही तू होता है ।
तेरे पास रहते मजा तो बहुत आता है, न जानना है परम अब तेरे चरम को ।
कमल सा खिल जाता हूँ, जब तेरी धुनों में सुर मिलाता हूँ ।
कैसे बताऊं क्या हाल होता है हमारा, नहीं रहता है नियंत्रण अपने आप पे ।
सच होता नजर आ रहा है, जहाँ में तेरे सिवाय है कोई नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह