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Hymn No. 1055 | Date: 10-May-1999
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दंग रह जाता हूँ प्रभु तेरा प्रेम देखके, कितना निश्चित होके रहता है तू ।
दंग रह जाता हूँ प्रभु तेरा प्रेम देखके, कितना निश्चित होके रहता है तू ।
मुझ जैसे को करीब अपने बुलाके, तरबतर कर देता है अपने प्रेम से ।
छायी न कभी तुझपे तेरी माया, आता जाता रहता है तू सदा जग में ।
तेरे करीब रहके कुछ पलो के लिये वही धर्म आ जाता है हममें ।
भाव आते-जाते है अनेको बार, तू रहता है सदा निजआनंद में ।
तेरी तटस्थ मस्ती देखके, मस्त हो जाता हूँ मै भीतर से ।
कायल हो गया हूँ तेरा, हर पल आते-जाते हैं भाव कई-कई लेके तुझे ।
बन जाना चाहता हूँ तेरे अनंत सागर की इक लहर ।
मजा ही मजा करुँगा मेरे बाहर और भीतर जब तू ही तू रहेगा ।
तेरा प्रेम देखके हो गया है मुझे पूरा विश्वास, जो तू चाहेगा वही होगा ।


- डॉ.संतोष सिंह