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Hymn No. 1057 | Date: 11-May-1999
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तेरा सजदा करते हैं एक से एक विद्वान, जिनके आगे चमके सूरज दीपक की भाँति ।
तेरा सजदा करते हैं एक से एक विद्वान, जिनके आगे चमके सूरज दीपक की भाँति ।
तेरी महफिल में आते है एक से एक दिवाने, दिवानगी देखके उनकी शरमाते हैं भौरे भी ।
तुझपे कुर्बान होने चले आते हैं न जाने कितने परवाने, दातों तले उगलिया दबा लेते है लोग उनकी देखके कूर्बानी ।
तेरे महफिल में हों या न हों मस्त रहते मस्ताने प्यार में तेरे, उनकी मस्ती का जुनून छा जाता है तुझपे ।
तेरे प्रेमियों की है पूरी बारात, हर एक का प्यार करने का ।
अपना अपना अलग अंदाज है रहता ।
विशालता और प्रेम का मेल है कुछ ऐसा, सोंच में पड़ जाते हैं हम ये जमीं के है या कहीं और से आये ।
तेरी तो छोड इनके चरण रज पड जाये दिल पे, तो खिल उठेगा जीवन कमल के समान ।
बिसात न है कोहिनूर के हीरों के सामने कोयले की, संगत मिल गयी प्रभु तेरी कृपा से ।
अरमान होंगे हजार दिल में मिट गये देखके इनको सारे, जीते जी तर गये करके दर्शन हम इनके ।
बनूँ मैं राख खाक में मिलके, तेरा और तेरे मस्तानो के कदम चूम लूं ।


- डॉ.संतोष सिंह