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Hymn No. 1058 | Date: 11-May-1999
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अंदाज न था हमको इतना तेरे प्यार का, जीते जी जन्नत मिल गयी ।
अंदाज न था हमको इतना तेरे प्यार का, जीते जी जन्नत मिल गयी ।
बहुत बार सुना था लोगो से खुदा आता है धरा पे, न जाने कैसे मुलाकात हो गयी ।
अंदाज न था हमारा कुछ ऐसा, मिलते-मिलते न जाने कब पूजा प्यार में बदल गयी ।
माफ करना काबिल तो नहीं हम तेरे, तेरी चाह से महफिल में आ गये ।
नगवारियों को दूर करना मेरे हाथो में नहीं, तुझसे दूर जा नहीं सकता मेरा दिल कभी ।
जैसा भी हूँ तेरा हूँ, घुटने टेक के कहता हूँ, जो तू बना दे वैसा ही बनना चाहूँगा।
मिसाल मुझे कोई कायम न है करनी, गुमनाम होके तेरे प्यार का जाम पीना चाहता हूँ ।
हर पवित्र दिल में है तेरा धाम, आज से वास कर ले तू हमारे मन-मंदिर में ।
सजा जो भी मिलेगी कबूल करुंगा तेरा प्यार समझके, बांध ले बंधन में तू आज हमें ।
रहबर रहमत बरसाता आया है तू हम नाचीजो पे, कुछ कर दे ऐसा बंधन में प्यार में खुदको ।


- डॉ.संतोष सिंह