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Hymn No. 1067 | Date: 14-Apr-1999
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प्रिय तूने क्या न दे दिया, इस बेसहारा को सहारा दे डाला प्यार का अपने ।
प्रिय तूने क्या न दे दिया, इस बेसहारा को सहारा दे डाला प्यार का अपने ।
लायकियत तूने न परखी हमारी, स्थान दे दिया अपने श्री चरणों में हमको ।
देखा तूने न कभी हमारी कमियों को, पीने दिया अपने चरण अमृत को ।
किसी कोने में पड़ा था, अपने अमृतमय गीतों से सहारा देके खड़ा किया ।
कौन से कर्म न किये थे हमने, फिर भी कूट-कूटके भरा परम विश्वास हममें तूने ।
लज्जा के शिकार थे हम, हमारे मन में हुये सडे-फोडे को साफ किया अपने प्यार से ।
इस गये-बीते के सामने, बूझ-अबूझ संसार के हर रहस्य पर से परदा उठाता गया तू ।
तेरी विशालता देखके हैरान रह गया मैं, मेरी हैरानी को इक झटके से दूर कर दिया तूने ।
प्रभु मैं कुछ कहने के लायक तो नहीं, छूटे न कभी मेरे दिल पे से छाप तेरी ।
कुछ भी हो जाये होता रहे, कैसे भी करके गुजरबसर कर लूंगा, तेरे बिना जी नहीं सकूंगा ।


- डॉ.संतोष सिंह