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Hymn No. 1068 | Date: 14-May-1999
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जन्मों-जन्म के बाद हाथ में जो तू आया, अब तुझे खोना नहीं चाहता ।
जन्मों-जन्म के बाद हाथ में जो तू आया, अब तुझे खोना नहीं चाहता ।
किस्मत में जो था नहीं, पाया हूँ आज उसे, कृपा से तेरी ।
मांगने पे मिलता नहीं या तो समर्थ बनूँ, या किसी की छत्र-छाया रहे हमपे ।
जीवन का खेल अजीब है कब क्या छूट जाये, किसी को न है खबर ।
हाँ खबरदार करता है वो जरूर, हम बेफिक्र रहते है अपने खेल में ।
तेरी किसी बात पे विरोध नहीं है मेरा, तो दिल में अवरोध क्यों है प्रभु ।
पीड़ित कौन किससे है, हमारे मन ओर दिल में इतना बे मेलपन क्यूं ।
न जाने कितनी सदियों से जंग जारी है हमारी अपने आप से ।
कोई गल नहीं जो होगा साथ तेरा, तो बदल देगे लिखी हुयी किस्मत को ।
हमारी ताकत से ज्यादा विश्वास है तुझपे, जो हो नहीं सकता वही तो होता आया है सदा से ।


- डॉ.संतोष सिंह