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Hymn No. 1069 | Date: 14-May-1999
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आशिकी का ये खेल है कैसा, कभी दूर कभी करीब रहते है हम ।
आशिकी का ये खेल है कैसा, कभी दूर कभी करीब रहते है हम ।
ये हमारी गफलत है कि, तेरे प्यार करने का कोई अजीब तरीका ।
इस मामले में है हम अनाड़ी, प्यार हुआ है पहली बार किसीसे ।
जनमों जनम के वादे को हमने नहीं है जाना, कसम से दिल को याद नहीं है कुछ ।
बीता हुआ याद आयेगा जरूर, ज्यों-ज्यों तेरे प्यार के बंधन में बंधते जायेंगे ।
दया न करना तू हमपे कभी, काबिल होंगे तो तू जरूर प्यार करना ।
जीवन में आंधी आये या तूफाँ, तू मत रोकना, एक तरफा होके बढ़ेगे तेरी ओर।
बहुत लिया सहारा अब न चाहिये, होश खोता है तो खोने देना पर प्यार करुँगा तुझसे जरूर ।
क्या न किया तू हमारे लिये अब कुछ मत करना, श्रद्धा और विश्वास से तुझे पायेगे जरूर
सलामती चाहता हूँ अपने प्यार की, मुझ जैसे ओरबों-खरबों कुर्बान होते है तो होने देना जरूर ।


- डॉ.संतोष सिंह