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Hymn No. 1070 | Date: 14-May-1999
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निर्बल है हमारा मन तो भी तेरे वजूद को कभी टाल सकता नहीं ।
निर्बल है हमारा मन तो भी तेरे वजूद को कभी टाल सकता नहीं ।
सूरज का उगना और ढलना जैसे तय है, वैसे तेरा पास हमारे होना है तय ।
खेल है हमारे निर्बल मन का, जो परम सत्य को जानके पहचानता नहीं ।
प्रभु घट-बढ तो चांद में भी होता है, हमारे प्यार के घट-बढ तो तू दूर करेगा जरूर ।
कसूर कितना भी हो हमारा, माया की धरा पे अच्छे-अच्छे का हाल होता है बुरा
कोई औकात नहीं हमारी बस है तेरे प्यार का सहारा, डूबना उबरना खेल है तेरा
जो कुछ भी कहा तुझसे हाले दिल बया किया, न गुमान है कुछ का न ही हीनता का ।
अंदाज है प्यार करने का सबका अलग-अलग, हम तो होश में रहना न चाहते है प्यार में तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह